जयपुर। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने ग्रीष्मकाल के दौरान पशु-पक्षियों को तेज गर्मी एवं लू से बचाने तथा उनके लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही दोपहर के समय पशुओं का भारवहन तथा कृषि कार्यों के लिए उपयोग पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों, स्थानीय निकायों एवं संबंधित विभागों को इस संबंध में समन्वित रूप से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने के कारण पशु-पक्षियों के लिए पेयजल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है, ऐसे में सभी संबंधित विभागों एवं आमजन की सहभागिता से इन मूक प्राणियों के लिए गर्मी के मौसम में पेयजल, छाया और चारे की व्यवस्था के लिए संवेदनशीलता के साथ प्रयास किए जाए।
पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश
मुख्य सचिव की ओर से जारी परिपत्र में बताया गया है कि राज्य के अधिकांश भागों में लगातार बढ़ते तापमान एवं तीव्र गर्मी के कारण भारवाहक पशुओं जैसे घोड़े, गधे, खच्चर, बैल एवं भैंसा आदि के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। अत्यधिक गर्मी एवं धूप में कार्य कराने से इन पशुओं में हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण, अत्यधिक थकावट तथा मृत्यु जैसी गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। भार ढोने वाले एवं माल ढोने वाले पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण नियम, 1965 के तहत 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले क्षेत्रों में दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक पशुओं से कार्य नहीं लिया जा सकता। इसी प्रकार पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (पशुओं का पैदल परिवहन) नियम, 2001 के अनुसार 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में पशुओं का पैदल परिवहन भी प्रतिबंधित है। जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन एवं संबंधित विभाग संयुक्त रूप से यह सुनिश्चित करें कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के मध्य पशुओं का भारवहन एवं कृषि कार्यों में उपयोग प्रतिबंधित रहे तथा इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए। उन्होंने पशु मालिकों को पशुओं के लिए पर्याप्त छाया, स्वच्छ एवं शीतल पेयजल तथा पौष्टिक चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए। जन-सहभागिता से जलकुंड एवं परिंडे लगाने और उनमें जल भराव की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर मुख्य सचिव ने ग्रीष्मकाल के दौरान निराश्रित, मार्ग से गुजरने वाले एवं कार्यशील पशुओं के लिए गौशालाओं, पशु आश्रय स्थलों, चारागाहों एवं प्रमुख मार्गों के आसपास जन-सहभागिता से जलकुंड स्थापित करने तथा उनमें नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पक्षियों को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए विद्यालयों, राजकीय कार्यालयों, सार्वजनिक स्थलों एवं घरों पर परिंडे लगाने के लिए आमजन, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों को प्रेरित किया जाए। साथ ही स्थापित जलकुंडों एवं परिंडों में नियमित रूप से जल भरे जाने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।


