जयपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रतिभाशाली व्यक्तित्व तैयार करने के केंद्र बिंदु है, यहां विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता के साथ-साथ उनके समग्र विकास पर फोकस होना चाहिए, जिससे वे उच्च कौशल के साथ गुणवान व चरित्रवान बनकर देश के विकास में अपनी महती भूमिका निभा सके।राज्यपाल श्री बागडे गुरुवार को प्रताप ऑडिटोरियम में राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के षष्ठम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में डिग्री एवं उपाधियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह पावन पर्व है। यह वह समय है जब विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूरी कर उसे व्यवहार में लाने योग्य बनता हैं। उन्होंने कहा कि आपने जो शिक्षा यहां प्राप्त की है, उसका उपयोग समाज के सर्वांगीण विकास के लिए करें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं। श्री बागडे ने कहा कि देश में आजादी के बाद ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ इसी उद्देश्य से तैयार हुई है, जिससे हमारा देश आत्मनिर्भर बन सके। नई शिक्षा नीति का मूल उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को रोजगार प्रदाता बनाना है। यह नीति शिक्षा तक सबकी आसान पहुँच, समता, गुणवत्ता, वहनीयता और जवाबदेही के आधारभूत पांच स्तंभों पर निर्मित हुई है। राज्यपाल ने कहा कि राजा भर्तृहरि की तपोभूमि पर स्थित यह विश्वविद्यालय ज्ञान के उत्कृष्ट केंद्र के रूप अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा वही सार्थक है, जो जीवन व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करे। किताबों में अब तक जो पढ़ा, उसे व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूद बौद्धिक क्षमता को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नही हैं। इसका असली उद्देश्य चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, नैतिक मूल्यों की स्थापना और समाज सेवा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन में आगे बढ़ने के अवसर ही नहीं देती बल्कि विद्यार्थी को संस्कारित करती है। उन्होंने कहा कि श्री विनोबा भावे ने शिक्षा पद्धति के बदलाव पर जोर देते हुए कहा था कि स्वतंत्रता के समय ही मैकाले की शिक्षा पद्धति को बदलकर भारतीय शिक्षा पद्धति को लागू किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने हमारे उद्योग धन्धे बंद कर दिए थे। श्री बागडे ने कहा कि हमारी शिक्षा ऐसी हो जिसमें परम्परा के साथ परिवर्तन की संभावनाएं हों। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के आचार्य युग के अनुरूप अपने आपको निरंतर अपडेट रखे। केवल पाठ्यपुस्तकों की पढ़ाई ही विद्यार्थियों को नहीं कराएं, बल्कि जीवन से जुड़े प्रत्येक ज्ञान से विद्यार्थी का साक्षात्कार कराए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नियम-विरूद्ध कार्य होने पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसलिए मेरा कुलगुरुओं से विशेष आग्रह है कि आप यह सुनिश्चित करें कि विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और गुडविल पर कहीं कोई दाग नहीं लगे। विश्वविद्यालय गुणवत्ता मानकों पर आगे से आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन, परिश्रम और नैतिकता जैसे मूल्यों को अपनाकर ही हम एक सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या आज छात्रों से अधिक है। यह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह संकेत है कि हमारा समाज सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहाँ बेटियाँ शिक्षा, शोध, सेवा और नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं। दीक्षांत समारोह में एक कुलाधिपति पदक, 42 स्वर्ण पदक, 6 रजत पदक एवं 40 पीएचडी उपाधि सहित 44 हजार 293 डिग्री प्रदान की गई।

राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय का षष्ठम दीक्षांत समारोह आयोजित, विश्वविद्यालय विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ व्यक्तित्व एवं कौशल विकास पर करें फोकस – राज्यपाल
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