बाल मुकुन्द ओझा
भारत में हर साल 5 अप्रैल को राष्ट्रीय समुद्री दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारत के समुद्री इतिहास और विरासत को याद करने और भारतीय समुद्री क्षेत्र के महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। आर्थिक दृष्टि से देखें तो समुद्री क्षेत्र भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं समुद्री क्षेत्र भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह दिन हमारे समुद्री क्षेत्र की रक्षा, सुरक्षा और बचाव की आवश्यकता के लिए मनाया जाता है। राष्ट्रीय समुद्री दिवस 5 महासागरों में व्यापार की सुविधा के जरिए समुद्री अर्थव्यवस्था के राष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है। भारत की समुद्री विरासत लगभग पांच हजार साल पुरानी है। आइये, राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर हम महासागरों के जन जीवन के बारे में जानते है।
यह सत्य है की समुद्र है तो जीव जंतुओं का अस्तित्व है। प्रकृति और मनुष्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। समुद्र जलवायु को नियंत्रित करता है, सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंडी हवा देता है। यह हमें भोजन और दवाओं के साथ-साथ परिवहन भी देता है। समुद्र से मानव को एक नहीं अनेक लाभ है। भूमि पर वर्षा, तापमान के संतुलन, खनिज के भंडार, मछलियों की बहुतायत से सुलभता और प्राकृतिक सौन्दर्य के साथ आवागमन के साधन भी महासागर उपलब्ध करते है। प्राचीन काल से लोग सागर की यात्रा करने और इसके रहस्यों को जानने की कोशिश में लगे रहे हैं, परंतु माना जाता है कि समुद्र के वैज्ञानिक अध्ययन जिसे समुद्र विज्ञान कहते हैं की शुरुआत कप्तान जेम्स कुक द्वारा 1768 और 1779 के बीच प्रशांत महासागर के अन्वेषण के लिए की गयीं समुद्री यात्राओं से हुई।
पृथ्वी पर जीवन का आरंभ समुद्र से माना जाता है। इसमे मनुष्य जीवन के साथ -साथ समुद्री जीव जंतु और पेड़ पौधों का जीवन निर्वाह होता है। सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से ये हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण और लाभदायक है। समुद्र असीम जैव विविधता का भंडार है। हमारी पृथ्वी का लगभग 70 प्रतिशत भाग महासागरों से घिरा है। महासागरों में पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त जल का लगभग 97 प्रतिशत जल समाया हुआ है। महासागरों की विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यदि पृथ्वी के सभी महासागरों को एक विशाल महासागर मान लिया जाए तो उसकी तुलना में पृथ्वी के सभी महाद्वीप एक छोटे द्वीप से प्रतीत होंगे। पृथ्वी पर पाँच महासागर हैं इनमें प्रशांत महासागर 6,36,34,000 वर्ग मील, ऐटलैंटिक महासागर 3,13,50,000 वर्ग मील, हिंद महासागर 2,83,56,000 वर्ग मील, आर्कटिक महासागर 40,00,000 वर्ग मील तथा ऐंटार्कटिक महासागर 57,31,000 वर्ग मील में फैला हुआ है।
विश्व में होने वाली वर्षा महासागरों पर ही निर्भर है। महासागर कभी सूखता नहीं, क्योंकि इसमें से जितना पानी वाष्प बनकर उड़ता है। वह वर्षा द्वारा नदियों में बहकर पुनरू सागर में मिल जाता है। इस प्रकार से पानी का एक चक्र बना रहता है। महासागर लहरों तथा ज्वार भाटा से कई प्रकार के कटाव एवं जमाव करता है, जिनसे विशेष प्रकार की भू-आकृतियाँ बनती हैं। लहरों से विभिन्न प्रकार के द्वीप तथा खाड़ियों का निर्माण होता है।
समुद्र दुनिया भर के लोगों के लिए भोजन, मुख्य रूप से मछली उपलब्ध कराता है किंतु इसके साथ ही यह कस्तूरों, सागरीय स्तनधारी जीवों और सागरीय शैवाल की भी पर्याप्त आपूर्ति करता है। सागर के अन्य मानव उपयोगों में व्यापार, यात्रा, खनिज दोहन, बिजली उत्पादन और नौसैनिक युद्ध शामिल हैं, वहीं आनंद के लिए की गयी गतिविधियों जैसे कि तैराकी, नौकायन और स्कूबा डाइविंग के लिए भी सागर एक आधार प्रदान करता है। समुद्र तटों की सैर मानव जीवन को अपार आनंद की अनुभूति कराते है। ये तट प्रमुख पर्यटनीय स्थलों के रूप में विकसित हो रहे है जहाँ प्रति वर्ष लाखों लोग अठखेलियों के लिए आते है। प्राकृतिक दृश्य मन मोह लेने वाला है। वास्तव में यहां का मनोरम दृश्य तुलना से परे है। समुद्र के सुनहरे और लुभावने तटों पर मनोरंजन के लिये सैर-सपाटा करना सैलानियों के लिये कोई नई बात नहीं है। सैलानी यहाँ स्वर्गिक आनंद का अनुभव करते हैं। समुद्र के सौन्दर्य को देखकर पर्यटकों की हृदय गति तीव्र हो जाती है।

समुद्र है तो जीव जंतुओं का अस्तित्व है
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