विनिर्माण क्षेत्र में स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ब्लू स्टार के साथ करार

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नई दिल्ली। भारत के विनिर्माण और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने मंगलवार को अग्रणी एयर कंडीशनिंग कंपनी ब्लू स्टार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य देश भर में स्टार्टअप और उद्यमियों का समर्थन करना है।

डीपीआईआईटी के उप सचिव टीएलके सिंह और ब्लू स्टार लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बी थियागराजन ने दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य एचवीएसी प्रौद्योगिकियों, डिजिटल समाधानों, उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाओं और आपूर्ति श्रृंखला नवाचार जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे उत्पाद स्टार्टअप्स के विकास को बढ़ावा देना है। इसका लक्ष्य संरचित उद्योग सहभागिता के माध्यम से स्टार्टअप्स को बढ़ावा और उद्योग-प्रासंगिक समाधान विकसित करने में सक्षम बनाना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि इस पहल के तहत स्टार्टअप्स को उद्योग विशेषज्ञों से मार्गदर्शन, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और परीक्षण सुविधाओं सहित बुनियादी ढांचागत सहायता, प्रायोगिक अवसर और बाजार संपर्क उपलब्ध कराए जाएंगे। यह साझेदारी स्टार्टअप्स को उत्पाद सत्यापन, प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (पीओसी) विकास और उद्योग मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण जैसे प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता करेगी।

इस सहयोग से स्टार्टअप्स को परीक्षण सुविधाओं, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना और तकनीकी सहायता के साथ-साथ संरचित मार्गदर्शन कार्यक्रमों और आवधिक सहभागिता सत्रों तक पहुंच प्राप्त करने में भी मदद मिलेगी ताकि नवाचारों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।इस सहयोग के तहत डीपीआईआईटी ब्लू स्टार लिमिटेड के साथ मिलकर भारत स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के अंतर्गत नवाचार चुनौतियों के आयोजन की संभावनाओं का पता लगाएगा, साथ ही एचवीएसी, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और विनिर्माण क्षेत्रों पर केंद्रित लक्षित हैकाथॉन का आयोजन करेगा।

डीपीआईआईटी के संयुक्त सचिव संजीव ने बताया कि यह सहयोग विनिर्माण क्षेत्र में उद्योग-प्रेरित नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह की साझेदारियां स्टार्टअप्स को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से जुड़ने और ठोस परिणामों के साथ समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने में सक्षम बनाती हैं।

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