नकली उत्पादों का बाजार : हर तीसरा व्यक्ति हुआ शिकार

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नकली सामान की समस्या से इस समय पूरी दुनिया जूझ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक बाजार में नकली सामान की हिस्सेदारी 5 प्रतिशत तक है। भारत में हालात ज्यादा चिंताजनक है। देश में नकली उत्पादों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, यहां 30 प्रतिशत तक नकली माल बाजार में मिलता है। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में नकली उत्पादों का मार्केट बहुत तेजी के साथ अपने पैर पसार रहा है। देश के 9 प्रमुख शहरों में किये गए एक सर्वे के अनुसार 2025 में 35 प्रतिशत शहरी उपभोक्ताओं ने नकली उत्पाद खरीदने की बात स्वीकारी है। इसके अलावा 89 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने अपने जीवन में कम से कम एक बार नकली उत्पादों के शिकार जरूर हुए है। कपडे का बाजार नकली उत्पादों का प्रमुख बाजार है। दवाओं के मामले में भी चिंताजक स्थिति है। नकली सामानों से घिरी इस दुनिया में, धोखाधड़ी से खुद को बचाना बेहद ज़रूरी हो जाता है। ऑनलाइन खरीदारी के प्रति सतर्क रवैया अपनाकर, उपभोक्ता जालसाज़ों से होने वाले खतरों को कम कर सकते हैं। विक्रेताओं पर शोध करना, उत्पाद समीक्षाओं की बारीकी से जाँच करना और प्रामाणिकता की पुष्टि करना जैसी सरल रणनीतियाँ नकली सामानों की बाढ़ के खिलाफ़ सुरक्षा कवच का काम करती हैं।
नकली सामान केवल लग्जरी प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं है। घर की रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले जीरे से लेकर खाना पकाने के तेल और बच्चों की देखभाल के सामान से लेकर दवाओं तक नकली सामानों की घुसपैठ लगातार बढ़ती जा रही है। खाने-पीने की चीजें, पर्सनल केयर प्रोडक्ट हाउसहोल्ड केयर प्रोडक्ट, हेल्थ केयर ओवर द काउंटर प्रोडक्ट और स्टेशनरी आदि अपैरल यानी फैशन के कपड़ों और एग्रीकल्चरल यानी बीज और खाद में सबसे ज्यादा नकली माल बाजार में मिलता है। फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स और कंस्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे एरिया में नकली सामान का बाजार 20 से 25 प्रतिशत तक है। नकली सामान खुले बाजार बिक रहा है। मिलावटी या नकली खाने-पीने की चीजें, जीवन रक्षक दवाएं, कृषि उत्पाद, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और फूड सप्लिमेंट बेच कर जिंदगी से खेला जा रहा है। नकली इलेक्ट्रॉनिक सामान, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, गैजेट्स और फैशन की चीजों से कंस्यूमर ठगे जा रहे हैं। नकली सामानों की घुसपैठ और तस्करी पर रोक ना लगने से देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है। केवल पांच प्रमुख सेक्टर्स में ही नकली सामानों और स्मगलिंग की वजह से सरकार को सालाना 8 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है।
इन सेक्टर्स में FMCG, टेक्सटाइल एंड अपैरल, अल्कोहल और टोबैको शामिल हैं। नकली सामानों का ये अवैध ट्रेड सबसे ज्यादा FMCG सेक्टर को नुकसान पहुंचा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में नकली सामान एक प्रमुख मुद्दा है, जिससे उपभोक्ताओं, व्यवसायों और सरकारों को बहुत ज़्यादा जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसमें नकली फ़ैशन उत्पादों से लेकर नकली दवाइयों तक शामिल हो सकते हैं, जो उपभोक्ता की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, ब्रांड के भरोसे को खत्म कर सकते हैं और भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। वास्तव में, के अनुसार कॉर्सर्च अनुमान वर्ष 3.3 में वैश्विक व्यापार में नकली वस्तुओं की हिस्सेदारी 2023 प्रतिशत होगी और वर्ष 5 तक यह आंकड़ा बढ़कर 2030 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है। यह एक बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति है जो समस्या के पैमाने और तीव्र वृद्धि को दर्शाती है।

-बाल मुकुंद ओझा

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