दुनिया उठा रही है तीन देशों के युद्ध का खामियाजा

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बाल मुकुंद ओझा
तीन देशों के युद्ध में इस समय समूची दुनिया प्रभावित हो रही है। अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है और तेल गैस का संकट खड़ा हो गया है। भारत अपनी गुट निरपेक्षता के लिए जाना जाता है और इस समय भारत भी कई प्रकार के संकट झेलने को मजबूर है। युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति सूद पेजेशकियन के साथ फोन पर अहम बातचीत की है। टेलिफोन पर हुई चर्चा के बाद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट लिखकर ईरानी नेता के साथ हुई अहम बातचीत का ब्योरा साझा किया है। मोदी ने लिखा- ‘मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से क्षेत्रीय गंभीर स्थिति पर चर्चा करने के लिए बातचीत की है। इस दौरान मैंने तनाव बढ़ने से रोकने, नागरिकों की जान की हिफाजत और नागरिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता जताई। युद्ध अगर लंबा चला तो इस महंगाई का असर देश की आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है। अप्रत्यक्ष रूप से दुनिया के करीब 40 देश इस जंग में शामिल हैं। अमेरिका लाख दावा करे लेकिन इस युद्ध से दुनियाभर में चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं, इस युद्ध का असर ईरान, इजरायल और अमेरिका तक सीमित नहीं है. आर्थिक जंग की चपेट में दुनियाभर के तमाम देश आ चुके हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का सीधा असर भारत में गैस की सप्लाई, तेल की कीमतों और जरूरत की अन्य चीजों पर पड़ने लगा है। भारत में इस समय एलपीजी के संकट से देशभर में हाहाकार मचा हुआ है। सरकार की लाख सफाई के बावजूद लोग खाली सिलेंडर लिए घूम रहे है। सरकार का दावा है कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार है, लेकिन टैंकरों की आवाजाही जल्द शुरू नहीं हुई तो यह भी दबाव में आ सकता है। एलपीजी की कमी के कारण जोमैटो और स्विगी के ऑर्डर्स में 50-60 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है। यूनियन के अनुसार, लगभग 1 करोड़ लोग (डिलीवरी पार्टनर, रेस्टोरेंट स्टाफ और ड्राइवर) इस संकट की चपेट में आ सकते हैं। दिल्ली जैसे शहरों में डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई इतनी कम हो गई है कि परिवारों को खाना छोड़ना पड़ रहा है। होटल रेस्टोरेंट भी बंद होने की कगार पर है। कई रेस्टोरेंट, ढाबे, क्लाउड किचन, कैटरिंग सर्विस और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अपना काम बंद करना पड़ा है या फिर सीमित स्तर पर चलाना पड़ रहा है। विपक्ष नरेंद्र सरेंडर के नारे लगाने में व्यस्त है। तीन देशों के युद्ध के बीच भारत के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। देश इस समय एलपीजी की कमी का सामना कर रहा है। इसी बीच कुछ जहाज होर्मुज से सकुशल भारत आने की बात भी कही जा रही है। अभी किसी को पता नहीं कि जंग कब रुकेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि जंग जल्द खत्म होगी। ट्रंप ने यहां तक कहा है कि मैं जब भी चाहूंगा, जंग खत्म हो जाएगी। ये जानना असंभव है कि ट्रंप क्या चाहते हैं। ईरान अमेरिका से बदला लेने की बात भी कह रहा है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़शकियान ने जंग रोकने के लिए तीन शर्तें रखी है। एक, ईरान को युद्ध का हरजाना दिया जाए, अमेरिका भविष्य में हमला न करने की गारंटी दे और ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दी जाए। अमेरिका-इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार को अपने पहले सार्वजनिक बयान में कड़े तेवर दिखाते हुए एलान किया कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि शहीदों और बच्चों के खून का बदला लिए बिना ईरान पीछे नहीं हटेगा। अमेरिका के सैन्य अड्डों पर हमले जारी रहेंगे।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार ईरान के भीतर अब तक 32 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। अब तक लगभग 2000 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश ईरानी नागरिक हैं। लेबनान में आठ लाख लोग विस्थापित हुए हैं।

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