राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान पूरे आदिवासी समाज का अपमान ..… गोपीचंद मीणा

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जयपुर। महामहिम राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मू के अपमान से जुड़े मुद्दे पर अनुसूचित जनजाति मोर्चा, राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष गोपीचंद मीणा ने आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल में भारत की महामहिम राष्ट्रपति के साथ हुए अपमानजनक व्यवहार पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा, भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा और पूरे आदिवासी समाज की अस्मिता को आहत करने वाली अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय घटना है। राष्ट्रपति पद की गरिमा के साथ किसी भी प्रकार की उपेक्षा, असंवेदनशीलता या लापरवाही लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक राष्ट्रपति पद के प्रति गहरी श्रद्धा और सम्मान रखता है, इसलिए इस पद की गरिमा से जुड़ी किसी भी प्रकार की घटना पूरे राष्ट्र की भावनाओं को आहत करती है। उन्होंने बताया कि 7 मार्च 2026 को आयोजित नवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के दौरे पर गई थीं। राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से राष्ट्रपति से जुड़े प्रोटोकॉल का समुचित पालन नहीं किया गया, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। गोपीचंद मीणा ने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों के संचालन के लिए निर्धारित “ब्लू बुक प्रोटोकॉल” के अनुसार कार्यक्रम स्थल, सुरक्षा व्यवस्था, स्वागत, प्रस्थान तथा अन्य औपचारिकताओं का अत्यंत अनुशासित और व्यवस्थित तरीके से पालन किया जाना अनिवार्य होता है। किंतु इस कार्यक्रम में पहले से निर्धारित कार्यक्रम स्थल को अचानक बदल दिया गया। प्रारंभिक रूप से कार्यक्रम विधाननगर में प्रस्तावित था, किंतु बाद में इसे स्थानांतरित कर गोसाईपुर (सिलीगुड़ी) कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का परिवर्तन राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता, लेकिन इस मामले में आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जो प्रोटोकॉल की गंभीर अवहेलना को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री, मंत्री,मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति अपेक्षित होती है, ताकि कार्यक्रम की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। किंतु इस कार्यक्रम में इन अधिकारियों की अनुपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति पद की गरिमा के अनुरूप आवश्यक संवेदनशीलता और गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति असम्मानजनक बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गोपीचंद मीणा ने कार्यक्रम में सामने आई प्रशासनिक अव्यवस्थाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों के लिए पास जारी करने की प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएँ उत्पन्न की गईं, जिससे अनेक प्रतिभागियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके अतिरिक्त कार्यक्रम स्थल तक जाने वाले मार्गों की समुचित सफाई तक नहीं करवाई गई वहां कचरे के ढेर लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि जहां राष्ट्रपति के ठहरने की व्यवस्था की गई थी, वहां भी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव देखा गया। शौचालयों में पानी तक उपलब्ध नहीं था I कार्यक्रम में शामिल लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा के साथ गंभीर खिलवाड़ है। गोपीचंद मीणा ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केवल भारत की राष्ट्रपति ही नहीं हैं, बल्कि वे देश के करोड़ों आदिवासी नागरिकों की आशा, आत्मसम्मान और गौरव का प्रतीक हैं। एक आदिवासी महिला का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुँचना भारत के लोकतंत्र की ताकत है। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार की अपमानजनक स्थिति पूरे आदिवासी समाज की भावनाओं को गहराई से आहत करती है। अनुसूचित जनजाति मोर्चा राष्ट्रपति पद की गरिमा और आदिवासी समाज के साथ किसी भी प्रकार का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा I उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस प्रकार की घटनाएँ सामने आई हों। पूर्व में भी पश्चिम बंगाल में कुछ नेताओं द्वारा राष्ट्रपति के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ की गई थीं और आदिवासी समाज की परंपराओं एवं संस्कृति के प्रति अपमानजनक व्यवहार देखने को मिला था I उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति मोर्चा इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है और इसके विरोध में पूरा आदिवासी समाज एकजुट है I उन्होंने कांग्रेस की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए कांग्रेस पार्टी, जो INDI गठबंधन की प्रमुख सहयोगी है, इस मामले पर चुप क्यों है ? कांग्रेस अक्सर विदेशों के मुद्दों और अन्य देशों में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर बयान देती है और राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करती है, लेकिन भारत की एक आदिवासी महिला राष्ट्रपति के अपमान पर उनकी चुप्पी आदिवासी समाज के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाती है। गोपीचंद मीणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनजातीय समाज के सम्मान, अधिकारों और विकास के लिए निरंतर ऐतिहासिक कदम उठा रही है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के बजट 2026-27 में पिछले वर्ष की तुलना में 42 प्रतिशत वृद्धि की गई है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए प्रारंभ की गई पीएम जनमन योजना तथा धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी योजनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार आदिवासी समाज के समग्र सशक्तिकरण और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री भूपेंद्र सैनी भी उपस्थित रहे।

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