युवाओं को लोन, छात्रों को ई-वाउचर, स्कूलों की बदलेगी सूरत, सरकार के बजट में बड़े फैसले

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जयपुर। राजस्थान की डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री दीया कुमारी ने आज विधानसभा में भजनलाल सरकार का तीसरा पूर्ण बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में युवाओं, शिक्षा, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट पर खास जोर दिया गया है। सरकार ने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने, भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने और स्कूल-कॉलेजों की हालत सुधारने के लिए कई बड़ी घोषणाएं की हैं।

युवाओं के लिए लोन और रोजगार योजना
मुख्यमंत्री युवा एवं रोजगार योजना के तहत युवाओं को लोन दिया जाएगा। इसके लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे करीब 30 हजार युवाओं को फायदा मिलेगा। इसके अलावा 1 लाख युवाओं को 10 लाख रुपये तक के कर्ज पर शत-प्रतिशत ब्याज अनुदान देने की घोषणा भी की गई है, ताकि वे अपना काम शुरू कर सकें।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए नई एजेंसी
राज्य में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुगमता बढ़ाने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तर्ज पर राजस्थान स्टेट टेस्टिंग एजेंसी बनाई जाएगी। साथ ही अलग-अलग जिलों में ऑनलाइन टेस्टिंग सेंटर भी बनाए जाएंगे, ताकि परीक्षाएं ज्यादा साफ और आसान तरीके से हो सकें।

छात्रों को साइकिल और लैपटॉप के लिए ई-वाउचर
सरकार छात्रों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए ई-वाउचर देगी, जिससे वे साइकिल और लैपटॉप खरीद सकेंगे। कक्षा 6वीं, 8वीं और 12वीं के छात्रों को 20-20 हजार रुपये के डीबीटी वाउचर मिलेंगे। कक्षा 9वीं में प्रवेश लेने वाले छात्रों को निशुल्क साइकिल दी जाएगी, इसके लिए भी ई-वाउचर जारी होंगे। इस पूरी योजना पर सरकार करीब 250 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

स्कूलों की हालत सुधरेगी
प्रदेश में 2,500 स्कूलों की मरम्मत कराई जाएगी, जिस पर 550 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 300 ऐसे स्कूल जिनके पास अपना भवन नहीं है, उनके लिए नए भवन बनाए जाएंगे, इस पर 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा 300 से ज्यादा जर्जर हालत वाले स्कूलों को भी ठीक किया जाएगा। छात्रावासों के काम भी कराए जाएंगे।

आंगनबाड़ी और बच्चों के लिए ‘जादुई पिटारा
प्रदेश के 22,746 आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए ‘जादुई पिटारा’ यानी खेल सामग्री और किट दी जाएगी। इस पर सरकार 323 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका मकसद बच्चों को खेल-खेल में अच्छी शिक्षा से जोड़ना और आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाना है।

व्यावसायिक शिक्षा का दायरा बढ़ेगा
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूल स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को और बढ़ाया जाएगा। अभी 4,019 स्कूलों में यह सुविधा है। अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 500 और स्कूलों में इसे शुरू किया जाएगा। इस योजना पर 51 करोड़ 10 लाख रुपये खर्च होंगे, जिससे संसाधन, उपकरण, प्रशिक्षण सामग्री और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।

स्किल डेवलपमेंट में नया मॉडल
राजस्थान में पहली बार आउटकम बेस्ड स्किल इम्पैक्ट मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत जब प्लेसमेंट जैसे तय मानदंड पूरे होंगे, तभी भुगतान किया जाएगा। युवाओं को स्किल के साथ रोजगार के काबिल बनाने पर जोर रहेगा। हॉस्पिटैलिटी, आईटी और हेल्थ सर्विस जैसे क्षेत्रों में एक हजार युवाओं को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार किया जाएगा। चयनित युवाओं को अंग्रेजी, जापानी, फ्रेंच, जर्मन और कोरियन भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

खेल और अन्य बड़े ऐलान
400 स्कूलों को सीएम राइज स्कूलों में बदला जाएगा, इस पर करीब 1,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय, जयपुर को 100 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। जोधपुर में रिमोट सेंसिंग सेंटर में स्पेस गैलरी बनाई जाएगी और वहीं कौशल प्रशिक्षण केंद्र भी बनेगा। बंजारा समुदाय के बच्चों की पढ़ाई के लिए हर शहर में एक स्कूल खोलने की योजना का भी ऐलान किया गया है।

शहीदों के बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ी
शहीदों के बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति बढ़ा दी गई है। पहले इसमें 1,800 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक खेल कूद प्रतियोगिता के लिए अब एक लाख रुपये मिलेंगे। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी पहल की घोषणा की है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री दीया कुमारी ने बताया कि ‘राजममता – राजस्थान मेंटल अवेयरनेस, मेंटोरिंग एंड ट्रीटमेंट फॉर ऑल’ कार्यक्रम जल्द शुरू किया जाएगा। इसके तहत सवाई मानसिंह चिकित्सा महाविद्यालय, जयपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ स्थापित किया जाएगा, जो काउंसलिंग और टेलीमेडिसिन सेवाओं के लिए काम करेगा। साथ ही, जिला चिकित्सालयों में मेंटल हेल्थ केयर सेल बनाए जाएंगे और वहां साइकियाट्रिक डॉक्टरों के साथ साइकोलॉजिकल काउंसलर्स भी नियुक्त किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य मानसिक रोगों की जल्दी पहचान करना, परामर्श देना, इलाज करना, पुनर्वास और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराना है। विद्यालयों और कॉलेजों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट और मेंटल हेल्थ अवेयरनेस अभियान चलाया जाएगा। उच्च माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षित काउंसलर हर महीने कम से कम एक मेंटल हेल्थ काउंसलिंग और अवेयरनेस सत्र अनिवार्य रूप से लेंगे।

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