जयपुर। हरियाणा के सूरजकुंड, फरीदाबाद में 15 फरवरी तक आयोजित हो रहे 16 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में राजस्थान मंडप आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मेले में राजस्थानी हस्तशिल्प उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है साथ ही राजस्थान के पर्यटन क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी आगंतुकों को उपलब्ध करवाई जा रही है। राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक छत्रपाल यादव ने बताया कि सूरजकुंड मेले में इस बार 11 फरवरी को राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सांस्कृतिक संध्या मुख्य चौपाल मंच, सूरजकुंड मेला परिसर में सायं 6.30 बजे से प्रारंभ होगी। उन्होंने बताया कि इस सांस्कृतिक संध्या में राजस्थान की समृद्ध लोककला, लोकनृत्य एवं लोकसंगीत की विविध झलकियाँ प्रस्तुत की जाएंगी। कार्यक्रम की शुरुआत खड़ताल वादन एवं गायन से होगी, जिसमें बाड़मेर के मगड़ा खां मागनियार अपनी प्रस्तुति देंगे। यादव ने बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रम अजमेर की सु अरूषिका द्वारा चरी नृत्य एवं घूमर नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। बूंदी के हरिशंकर नागर द्वारा कच्छी घोड़ी नृत्य दर्शकों को आकर्षित करेगा। डूंगरपुर के गफूरुद्दीन मेवाती (पद्म 2026) द्वारा मृदंग वादन प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में जयपुर की पद्म से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध मती गुलाबो सपेरा द्वारा कालबेलिया नृत्य तथा डूंगरपुर के विष्णु शर्मा द्वारा मयूर एवं फूलों की होली की मनमोहक प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम के उद्घोषक के रूप में अलवर के धर्मेन्द्र सिंह अपनी भूमिका निभाएंगे। राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से सूरजकुंड शिल्प मेले में देश-विदेश से आए पर्यटकों को राजस्थान की लोक- संस्कृति और परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले में राजस्थान मंडप बना आकर्षण का केन्द्र— 11 फरवरी को होगी राजस्थानी सांस्कृतिक संध्या— पद्मश्री गफूरुद्दीन मेवाती और गुलाबो सपेरा देंगी अपनी प्रस्तुति
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