जयपुर: पंच गौरव संरक्षण, संवर्धन एवं विकास के लिए हर संभव प्रयास होंगे सुनिश्चित – जयपुर जिला कलक्टर के निर्देश पर कलेक्ट्रेट सभागार में हुआ समीक्षा बैठक का आयोजन

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जयपुर। जयपुर जिले में चिन्हित पंच-गौरव से जुड़े स्थलों के संरक्षण, संवर्धन एवं समग्र विकास को लेकर गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार, जयपुर में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंच-गौरव योजना को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने तथा इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रथम मती विनीता सिंह ने बैठक में राज्य स्तर से पंच-गौरव योजना के लिए आवंटित बजट की बिंदुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृतियां लंबित हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र जारी किया जाए। साथ ही जिन कार्यों की वित्तीय स्वीकृतियां पूर्व में जारी हो चुकी हैं, उन कार्यों को अविलंब प्रारम्भ कर समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए, ताकि योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ शीघ्र रूप से दिखाई दे। मुख्य आयोजन अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा गत 1 जनवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित पंच-गौरव योजना की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए निर्देशों की अनुपालना सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए योजना के लक्ष्यों को तय समय-सीमा में पूर्ण करें। उन्होंने बताया कि पंच-गौरव की महत्ता, उपयोगिता एवं आवश्यकता को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से निर्देशित किया गया कि सभी राजकीय कार्यालयों, सरकारी एवं निजी विद्यालयों तथा शैक्षणिक संस्थानों में पंच-गौरव का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इससे युवाओं, विद्यार्थियों एवं आमजन में अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं सामाजिक धरोहरों के प्रति जागरूकता एवं संरक्षण की भावना विकसित होगी। मुख्य आयोजन अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि कार्यक्रमों, मेलों एवं सार्वजनिक आयोजनों में पंच-गौरव से संबंधित स्टॉल लगाए जाएं, जहां आमजन को पंच-गौरव स्थलों की जानकारी, उनके संरक्षण की आवश्यकता तथा उनसे जुड़ी सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराया जाएगा। संबंधित विभागों को पंच-गौरव के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु अधिकाधिक पहल करते हुए इसे जनभागीदारी से जोड़ने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी कहा गया कि पंच-गौरव केवल धरोहर संरक्षण की योजना नहीं, बल्कि यह स्थानीय पहचान, सांस्कृतिक गौरव एवं भावी पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इसके संरक्षण एवं विकास के लिए प्रशासन, शिक्षा संस्थानों और समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।

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