धुरंधर की आलोचना करने वालों को विवेक ओबेरॉय की दो टूक, कहा- ‘यह सिर्फ फिल्म नहीं’

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मुंबई। रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और संजय दत्त स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है। फिल्म ने वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1,240 करोड़ रुपए कर लिया है। फिल्म को आज भी खूब तारीफ मिल रही है। विवेक रंजन अग्निहोत्री के बाद अब विवेक ओबेरॉय ने फिल्म की जमकर तारीफ की है और फिल्म का विरोध करने वालों को लेकर भी दो टूक बात कही है। फिल्म ‘धुरंधर’ की तारीफ करने के लिए विवेक ओबेरॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ का सहारा लिया है। उनका कहना है कि फिल्म को वही लोग अच्छे से महसूस कर सकते हैं, जिन्होंने किसी अपने को देश की शांतिपूर्ण स्थिति के लिए कुर्बान किया हो। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘आज आखिरकार मैंने ‘धुरंधर’ देखी। यह सिर्फ सिनेमा नहीं, उससे कहीं बढ़कर है। यह एक घोर अंधेरे कमरे में अचानक से कुछ बदल जाने जैसा झकझोर देने वाला है।’
उन्होंने आगे लिखा, “अगर आपने कभी किसी शहीद के घर की घुटन भरी खामोशी में खड़े होकर देखा है, जहां दीवारें यादों से भरी हैं, लेकिन कुर्सियां ​​हमेशा खाली रहती हैं। अगर आपने उन गलियारों में इतिहास की ठंडी सांस महसूस की है, जहां गुमनाम लोगों ने हमारे ‘शांतिपूर्ण’ आज के लिए अपना ‘कल’ कुर्बान कर दिया। अगर आपने उस बच्चे की आंखों में देखा है, जो अपने पिता को सिर्फ एक फ्रेम में लगी तस्वीर के शीशे के पार से ही जानता है, तो आप इस फिल्म की धड़कन को पहचान लेंगे। आक्रोश उन लोगों के लिए विलासिता है, जिन्होंने कभी तथ्यों का सामना नहीं किया।”
विवेक ने रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना की एक्टिंग की भी तारीफ की और कहा कि रणवीर ने अपनी एनर्जी का सही इस्तेमाल किया है। उन्होंने लिखा, “रणवीर संयम के भीतर दबी हुई आग से जल रहे हैं, यह साबित करते हुए कि मौन किसी भी गर्जना से अधिक भयावह हो सकता है।”
यह पहला मौका नहीं है जब किसी ने फिल्म और फिल्म के डायरेक्टर की तारीफ की हो। रिलीज के साथ ही, जिसने भी फिल्म देखी है, वो तारीफ किए बिना रह नहीं पाया है। अनुपम खेर ने फिल्म देखने के बाद ये तक कह दिया था कि आदित्य पर ‘माता चढ़ गई’ है। उन्होंने फिल्म को लेकर तीन से चार वीडियो पोस्ट की थीं। ‘इक्कीस’ के रिलीज के बाद भी ‘धुरंधर’ सिनेमाघरों में अपना कमाल दिखा रही है। 5 दिसंबर को रिलीज हुई फिल्म इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है। पहले यह खिताब ‘छावा’ के नाम था।

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