विकसित भारत बिल्डथॉन- दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय मूल्यांकन कार्यक्रम संपन्न

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जयपुर। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार एवं नीति आयोग (अटल नवाचार मिशन) द्वारा आयोजित विकसित भारत बिल्डथॉन—2025 के तहत एक राज्य स्तरीय मूल्यांकन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त अनुपमा जोरवाल की अध्यक्षता में डॉ. राधाकृष्णन शिक्षा संकुल में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राओं ने आत्मनिर्भर भारत, समृद्ध भारत, स्वदेशी एवं वोकल फॉर लोकल विषयों पर आधारित अपने नवोन्मेषी आइडिया एवं प्रोटोटाइप विकसित कर निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किए। राज्य स्तर पर चयनित श्रेष्ठ आइडिया एवं प्रोटोटाइप को अब शिक्षा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्तर के अंतिम मूल्यांकन के लिए भेजा जाएगा। विकसित भारत बिल्डथॉन 2025 के अंतर्गत 10 राष्ट्रीय विजेताओं का चयन किया जाएगा। इसके साथ ही 100 राज्य स्तरीय और एक हजार जिला स्तरीय विजेता भी चयनित किए जाएंगे। सभी चयनित विजेताओं को मेंटोरिंग एवं संसाधन सहयोग प्रदान किया जाएगा, ताकि उनके नवाचारों को व्यावहारिक स्वरूप दिया जा सके। इस संबंध में विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित एक चयनित टीम द्वारा राजस्थान के विद्यालयों का सर्वेक्षण कर विद्यार्थियों के नवाचारों का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों के अथक परिश्रम, रचनात्मक सोच और नवाचारों की सराहना करते हुए टीम का आभार व्यक्त किया। इस दौरान आयुक्त श्रीमती जोरवाल ने राज्य में विद्यालय स्तर पर संचालित नवाचारों, उन्नत तकनीक से युक्त अध्ययन पद्धतियों तथा प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था की जानकारी भी साझा की। अंत में टीम के सभी सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इस मूल्यांकन कार्यक्रम में अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक श्रीमती सीमा शर्मा व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। विकसित भारत बिल्डथॉन—2025 देश के विद्यार्थियों को नवाचार के माध्यम से राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो नए भारत की परिकल्पना को साकार करने में सहायक सिद्ध हो रही है। इस राष्ट्रीय स्तरीय पहल का शुभारंभ 23 सितंबर 2025 को किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यालयी विद्यार्थियों में नवाचार, रचनात्मक सोच तथा समस्या-समाधान क्षमता का विकास करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित विजेताओं को मेंटोरिंग एवं आवश्यक संसाधन सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिससे उनके नवाचारों को आगे विकसित किया जा सके।

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