चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव के अंतर्गत गुरुवार रात्रि आयोजित सांस्कृतिक संध्या लोक संस्कृति, परंपराओं और बाल कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियों से सजी रही। सांस्कृतिक मंच पर केसरिया बालम की मधुर धुनों के साथ राजस्थान के सतरंगी रंग बिखरे, वहीं विभिन्न राज्यों की लोक विधाओं ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की विविधता से रूबरू कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत बाल कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुतियों से हुई, जिन्होंने अपने आत्मविश्वास और प्रतिभा से दर्शकों का मन जीत लिया। कथक शास्त्रीय नृत्य की सधी हुई भाव-भंगिमाओं ने मंच को गरिमा प्रदान की, जबकि हरियाणा के लोक नृत्य की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
कश्मीरी लोक कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण रही। पारंपरिक कश्मीरी वेशभूषा और मधुर लोक धुनों के साथ प्रस्तुत नृत्य व संगीत ने मंच पर कश्मीर की समृद्ध लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की, जिस पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियों से कलाकारों का स्वागत किया।
लक्ष्मीराल रावल ग्रुप द्वारा प्रस्तुत मेवाड़ का प्रसिद्ध लोक नाट्य तुर्रा-कलंगी भी दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहा। पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्यों की संगत में प्रस्तुत इस लोक नाट्य में तुर्रा और कलंगी दो पक्षों के बीच गीतात्मक संवाद, तर्क-वितर्क और लोक हास्य के माध्यम से सामाजिक समरसता, शौर्य और जीवन मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
जैसलमेर से आए मंगणियार लोक कलाकारों द्वारा उस्ताद लालू खां एंड पार्टी की प्रस्तुति ने मरुस्थलीय लोक संगीत की समृद्ध परंपरा को जीवंत कर दिया। सूफियाना भाव, मधुर स्वरलहरियों और खड़ताल, ढोलक व कमायचा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की संगत में प्रस्तुत लोक गीतों ने दर्शकों को राजस्थान की लोक चेतना से जोड़ दिया।
वहीं मंगलाराम भोपा द्वारा प्रस्तुत भोपा गायकी ने लोक आस्था और परंपरा की सजीव झलक प्रस्तुत की। रावणहत्था के करुण स्वरों के साथ लोक देवताओं और पौराणिक कथाओं का गायन किया गया, जिससे मंच पर भावपूर्ण और आध्यात्मिक वातावरण सृजित हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में चित्तौड़गढ़ के पीएम महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, स्टेशन, सेंट्रल एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रेनबो इंटरनेशनल स्कूल, चित्रगुप्त माध्यमिक विद्यालय सेंती, राबाउमावि शहर, एम्बीशन हाइट्स, विशाल एकेडमी, वेलोसिटी स्कूल सहित अनेक विद्यालयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। वहीं निम्बाहेड़ा से सरस्वती विद्या विहार, मॉडल स्कूल निम्बाहेड़ा, डिवाइन चाइल्ड पब्लिक स्कूल, नाइस एकेडमी एवं डी.डब्ल्यू.पी.एस. विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला। तालियों की गूंज और बाल कलाकारों के उत्साहवर्धन से पूरा वातावरण उल्लासमय बना रहा। स्वदेशी संस्कृति, लोक कलाओं और बाल प्रतिभाओं के इस संगम ने राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव को यादगार बना दिया। राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव के तहत आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत और नई पीढ़ी की प्रतिभा को मंच प्रदान करने की दिशा में एक सफल एवं सराहनीय प्रयास सिद्ध हुई।
इस अवसर पर जिले के अनेक प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से अपर जिला कलेक्टर (रावतभाटा) विनोद मल्होत्रा, यूआईटी सचिव कैलाश चंद्र गुर्जर, रघु शर्मा, हर्षवर्धन सिंह, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी अनुराधा आर्य, संजय कोदली सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।



