डॉ. श्वेता व्यास का यूके के कोवेंट्री विश्वविद्यालय में उच्च स्तरीय नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयन

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कोटा। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने ब्रिटिश काउंसिल यूके के सहयोग से ‘वीमेन इन साइंस लीडरशिप प्रोग्राम’ (डब्ल्यूआईएसएलपी) शुरू किया है। यह कार्यक्रम अंतरिक्ष एवं विज्ञान के क्षेत्र में लैंगिक समानता का वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसे समावेशी नेतृत्व ढांचा तैयार करके महिलाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार में सार्थक योगदान देने के लिए सशक्त बनाने के लिए शुरू किया गया है। इस कार्यक्रम के लिए कोटा विश्वविद्यालय की सहायक आचार्य रसायन शास्त्र कोटा विश्वविद्यालय डॉ. श्वेता व्यास का चयन किया गया है।
डॉ. व्यास का चयन उनके द्वारा अनुसंधान और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए किया गया है। डॉ. श्वेता व्यास 19 से 27 मार्च 2025 तक कोवेंट्री विश्वविद्यालय, यूके में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। इस दौरान उन्हें वैश्विक अनुसंधान दृष्टिकोण, नेतृत्व कौशल और अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान सहयोग पर विशेष प्रशिक्षण मिलेगा।
डॉ. व्यास सहित देशभर से लगभग 200 महिलाओं को डीएसटी नई दिल्ली एवं कोवेंट्री यूनिवर्सिटी के द्वारा प्रथम चरण के दौरान एक सप्ताह की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद उनमें से 20 महिलाओं को चरण-2 के लिए यूनाइटेड किंगडम के कोवेंट्री विश्वविद्यालय में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण के लिए चुना गया। इसका उद्देश्य महिला वैज्ञानिकों को नेतृत्व क्षमता और अनुसंधान कौशल में उत्कृष्टता प्रदान करना है।
इस पहल का उद्देश्य अंतरिक्ष एवं विज्ञान में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए लैंगिक-समावेशी प्रथाओं को मजबूत करने में संस्थानों का समर्थन करना है, जिसके लिए रणनीतिक नेतृत्व ढांचा विकसित किया जाएगा। यूके का कोवेंट्री विश्वविद्यालय इस पहल में डिलीवरी पार्टनर है। कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नेतृत्व और शासन की भूमिका में महिलाओं को सशक्त बनाना है ताकि संस्थानों को उनके लिंग-समावेशी प्रथाओं और नीतियों को मजबूत करने में समर्थन दिया जा सके।
डॉ. व्यास की इस उपलब्धि को कोटा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश सोढ़ाणी ने संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया। डॉ. व्यास ने कहा कि यह अवसर वैश्विक स्तर पर विज्ञान में महिलाओं के नेतृत्व के पथ को और बेहतर ढंग से समझने में मददगार बनेगा। विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए यह डीएसटी, नई दिल्ली की यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। शोध निदेशक प्रो. रीना दाधीच ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शोध एवं अनुसंधान के लिए मार्ग प्रशस्त होता है। कुलसचिव भावना शर्मा ने भी डॉ. व्यास को बधाई दी और बताया कि इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण से भारतीय महिला वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने और अपने अनुसंधान को नई ऊँचाइयों तक ले जाने का अवसर मिलता है।

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