अंबेडकर डीबीटी वाउचर योजना : किराए पर रहने वालों छात्रों को हर महीने मिलेंगे दो हजार रुपए

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बालोतरा। उच्च अध्ययन के लिए अपने घर से दूर किराए पर कमरा लेकर रहने वाले विद्यार्थियों को अब राज्य सरकार आर्थिक मदद दे रही है। ऐसे छात्रों को अंबेडकर डीबीटी वाउचर योजना के तहत हर महीने 2,000 रुपए यानी पूरे साल में 20,000 रुपए तक की सहायता राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा ने इस योजना के माध्यम से छात्रों को रहने और खाने के खर्च से राहत देने का काम किया है। ताकि छात्र पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इस योजना मे आवेदन की तिथि को बढ़ाकर अब 31 दिसंबर कर दिया गया है।
ई-मित्र पर ऑनलाइन कर सकते हैं आवेदन
ऑनलाइन आवेदन के लिए अभ्यर्थी को आधार, जन आधार, मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र, जिला स्थित राजकीय महाविद्यालय में अध्ययनरत होने का प्रमाण पत्र, किराए के मकान का प्रमाण पत्र, किरायानामा, किराया रसीद, गत वर्ष उत्तीर्ण कक्षा की अंक तालिका एवं बैंक खाते का विवरण आदि दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। इच्छुक अभ्यर्थी ई-मित्र, एसएसओ आईडी से इस पोर्टल पर जन आधार के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
यह है पात्रता शर्त
अंबेडकर डीबीटी वाउचर योजना का लाभ लेने को लेकर छात्र राजस्थान का मूल निवासी होना जरूरी है। विद्यार्थियों के माता-पिता की वार्षिक आय का निर्धारण विभाग की ओर से संचालित मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अनुरूप एससी, एसटी एसीबीसी के लिए 2.50 लाख रुपए, ओबीसी के लिए 150 लाख रुपए ईडब्ल्यूएस के लिए 1 लाख रुपए निर्धारित की गई है। विद्यार्थी जहां पढ़ रहा है और उनके माता-पिता का मकान उसी शहर में, वो इस योजना का पात्र नहीं होगा।
अधिकतम पांच वर्षों तक प्राप्त की जा सकती है यह सहायता
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के जिला परिवीक्षा एवं सामाज कल्याण अधिकारी घेवरचंद प्रजापत ने बताया कि विभाग की ओर से संचालित अंबेडकर डीबीटी वाउचर योजना में राज्य के एससी, एसटी, ओबीसी, अति पिछड़ा वर्ग एवं ईडब्ल्यूएस छात्र जो अध्ययन के लिए अपने घर से दूर दूसरे शहरों में राजकीय महाविद्यालयों में नियमित अध्ययन कर रहे हैं और किराए के घर में रहते हैं, उनको राज्य सरकार की ओर से हर साल पुनर्भरण राशि के रूप में रुपए बीस हजार प्रदान किए जाएंगे। पात्र अभ्यर्थी को प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में दो हजार रुपए प्रतिमाह अधिकतम दस माह के लिए प्रदान किए जाएंगे। इस योजना का लाभ एक अभ्यर्थी अधिकतम पांच वर्षों के लिए ही प्राप्त कर सकता है।

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