दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सोच बदलने का लिया संकल्प

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श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार मानसिक रूप से बीमार व बौद्धिक रूप से असक्षम व्यक्तियों को विधिक सेवाऐं योजना 2024 के तहत गठित 02 यूनिट का प्रशिक्षण कार्यक्रम लोक अदालत भवन गंगानगर में गुरूवार को आयोजित किया गया।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) गजेन्द्र सिंह तेनगुरिया ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत जिले के पैरा लीगल वॉलेंटियर व पैनल अधिवक्तागण को दिव्यांगजनों को मिलने वाले अधिकारों एव चल रही योजनाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि एवं एनजीओ उपस्थित रहे। तेनगुरिया ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में बताया कि वैश्विक स्तर पर दिव्यांगों के लिये समावेश, समान समाज की स्थापना के लिए भारत सहित सभी देशों की सरकारे वर्षोंं से प्रयासरत हैं। अन्य बच्चों के मुकाबले दिव्यांग हुये ज्यादातर बच्चों को स्कूल जाने का अवसर नहीं मिल पाता और स्वास्थ्य देखभाल मिलने की संभावना भी कम हो जाती है।
तेनगुरिया ने बताया कि हमें समाज में यह सुनिश्चित करना होगा कि हर व्यक्ति, चाहे उसकी क्षमता कुछ भी हो, अवसरों तक पहुॅंच सके और समाज में पूरी तरह से भाग ले सके। भारत सरकार ने भी सशक्तिकरण पर केंद्रित कई योजनाएं भी लागू की हैं, जिनमें वित्तीय सहायता कार्यक्रम, कौशल विकास पहल और शिक्षा के लिये सहायता सम्मिलित है। आज भारत में शहरी इलाकों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में दिव्यांगजन का घनत्व अधिक है और महिलाओं की तुलना में पुरूष अधिक दिव्यांग है, जब इसे ग्रामीण परिवेश में देखा जाए तो ग्रामीण इलाकों में परिवार की आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियॉं अधिक हो जाती है, जहॉं सुविधाओं का अभाव रहता है, जो शहरी इलाकों में उपलब्ध होती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन और भी कठिन हो जाता है।
इसके साथ ही तेनगुरिया ने बताया कि देश के ग्रामीण हिस्सों में गर्भवती माताओं और बच्चों को सही पोषण और देखभाल के साथ-साथ बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करने की जरूरत है। 05 वर्ष तक की आयु के बच्चों में दिव्यांगता की पहचान करना महत्वपूर्ण है। समुचित टीकाकरण और रोग निरोधक कार्यक्रमों को सामंजस्यपूर्ण बनाने की आवश्यकता है। वर्ष 2016 के कानून में भी महिलाओं के लिये गर्भावस्था के पहले और प्रसव के बाद ध्यान रखने पर बल दिया जाना चाहिए। दुर्घटनाओं के कारण उत्पन्न होने वाली दिव्यांगताओं में कमी लाने के लिये कार्य स्थल पर सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत है। ट्रक ड्राईवरों की ऑंखों का चेकअप, स्पीड गवर्नर आदि जैसे उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान सुधा पालवान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, गंगानगर, विनिता आहूजा सचिव जुबिन स्पास्टिक होम एंड चैरिटेबल ट्रस्ट, डॉ. भुवनेश शर्मा विधि व्याख्यता, रोहताश यादव चीफ डिफेंस कांउसिल, जगदीश चराया लेखाधिकारी समाज कल्याण, नगेन्द्र प्रताप व रंजय कुमार सिंह पाठ्यक्रम समन्वयक जगदम्बा अंधविधालय, डॉ. अशोक अरोड़ा वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, डॉ. मंजू बिश्नोई सहायक आचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज, गंगानगर ने भी दिव्यांगजन के बारे में प्रशिक्षण प्रदान किया।

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