जयपुर। राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान सोमवार को बायतु विधायक हरीश चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने सदन के पटल पर जो तथ्य रखे, वे प्रदेश के किसानों के लिए बेहद चिंताजनक हैं। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24, 2024-25 तथा 2025-26 (जनवरी 2026 तक) प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लिए गए उर्वरक, बीज और कीटनाशकों के नमूनों में से कुल 2220 नमूने अमानक पाए गए।
किसानों को मिल रही कृषि सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल
इस संबंध में विधायक हरीश चौधरी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह आँकड़ा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में किसानों को उपलब्ध कराई जा रही कृषि आदानों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। किसान पहले ही मौसम की अनिश्चितता, पानी की कमी और लगातार बढ़ती खेती की लागत जैसी कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है। ऐसे में यदि उसे खराब या अमानक बीज, उर्वरक और कीटनाशक मिलते हैं तो उसकी पूरी फसल और सालभर की मेहनत दांव पर लग जाती है।
सरकार की ओर से ठोस कार्ययोजना का अभाव
चौधरी ने कहा कि उन्होंने इस गंभीर विषय पर सरकार से स्पष्ट जवाब और ठोस कार्ययोजना की अपेक्षा की थी, लेकिन सरकार की ओर से इस समस्या के समाधान को लेकर कोई संतोषजनक रोडमैप सामने नहीं आया। इससे किसानों में चिंता और असंतोष स्वाभाविक है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई और मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी
उन्होंने कहा कि जब हजारों नमूने अमानक पाए गए हैं तो यह आवश्यक है कि नकली या घटिया कृषि सामग्री बेचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए जाएँ। साथ ही पूरे प्रदेश में कृषि आदानों की गुणवत्ता की नियमित, पारदर्शी और प्रभावी जांच व्यवस्था भी मजबूत की जानी चाहिए, ताकि किसानों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
किसानों के नुकसान की भरपाई का प्रावधान नहीं होना चिंता का विषय
हरीश चौधरी ने कहा कि सदन में सरकार की ओर से यह जवाब दिया गया कि खराब या अमानक कृषि सामग्री के कारण किसानों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है। यह बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। यदि किसान को नकली या खराब बीज, उर्वरक और कीटनाशक मिलने के कारण उसकी फसल खराब हो जाती है और उसके नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान ही नहीं है, तो यह सीधे-सीधे किसानों के साथ अन्याय है।
सरकार को कानून बनाकर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए
हरीश चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार से स्पष्ट मांग है कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए नकली और अमानक कृषि सामग्री पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाया जाए तथा इस दिशा में ठोस और सकारात्मक कदम उठाए जाएँ। साथ ही जिन किसानों को खराब कृषि सामग्री के कारण नुकसान हुआ है, उनकी क्षतिपूर्ति की जिम्मेदारी तय करने की भी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार इस जिम्मेदारी से हाथ खींच लेती है तो फिर किसानों के साथ न्याय कौन करेगा। सदन में जब सरकार के मंत्री की ओर से यह कहा जाता है कि नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है, तो यह प्रदेश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। हरीश चौधरी ने कहा कि किसान केवल घोषणाएँ नहीं चाहता, बल्कि उसे न्याय, पारदर्शिता और सुरक्षा चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों को नकली और घटिया कृषि सामग्री से बचाने के लिए सख्त कानून और प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करे, ताकि किसानों का भरोसा कायम रह सके।



